Friday, June 20, 2008

क्षणिकाएं

Jun 7, 2008 6:21 PM शुक्रवार पत्रिका में प्रकाशित

प्रियंका गांधी के घर
बन्दरों ने जब उत्पात मचाया
कितनी हुई विकट समस्या
सरकार की तब समझ में आया...

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को
कहा जब बच्चों ने दादी
झूम उठा मन खुशी के मारे
बनी जब दौसो पोतो की दादी...

"पाँचवी पास" फ़्लॉप हुआ
अब "दस का दम" क्या कर जायेगा
मोबाईल कम्पनियों की होगी चाँदी
करोड़ो को करोडो़ के सपने दे जायेगा...

खेल-खेल न रहा
व्यापार हो गया
आई पी एल का उतरा तो
अब फ़ुटबाल का बुखार हो गया...

इतने हुये टी वी चैनल
कि खबरे गोल हो गई
बिल्लो रानी चढ़ी छ्ज्जे पर
छः घण्टे तक मखौल हो गई
सुनीता शानू

5 comments:

Udan Tashtari said...

ये कार्यक्रम बढ़िया चालू कर लिया है. बधाई एवं शुभकामनाऐं.

सागर नाहर said...

नये चिट्ठे के लिये बहुत बहुत शुभकामनायें... अच्छी व्यंग कवितायें/ क्षणिकायें है।
यह वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें,तो बढ़िया होगा यह टिप्पणी करते समय बड़ा परेशान करता है।

॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

Amit K Sagar said...

अच्छी प्रस्तुति. स्वागत है आपका. आशा है निरंतर लिखती रहेंगी. शुभकामनायें.
---
उल्टा तीर

पी के शर्मा said...

आज की ताजा खबर को और ताजा करिये
शब्‍दों में थोड़ा पैनापन भरिये
कविता चाकू नहीं तलवार होती है
बड़ी सख्‍़त इसकी मार होती है
लिखते रहिये
बढि़या है
पढ़ कर आनंद आया

36solutions said...

बढिया प्रयास है आपका, धन्यवाद पुन: स्वागत है ।

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